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नौ दिनों तक मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें।

मिट्टी के बर्तन में जौ के बीज बोएं और नवमी तक प्रति दिन पानी का छिड़काव करें।

इस तरह नवरात्रि के पूरे दिनों में मां की आराधना करें।

यह समय साधक को आध्यात्मिक शक्ति और आत्मविश्वास प्रदान करता है।

लगा दें इसे, मिटेगा कष्ट-क्लेश, आएगी बरकत!

गुप्त नवरात्रि हिंदू सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक समय मानी जाती है। यह नवरात्रि विशेष रूप से गुप्त साधनाओं, तांत्रिक अनुष्ठानों, और महाविद्या की उपासना के लिए मनाई जाती है। इसे गुप्त इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी साधनाएं और अनुष्ठान गुप्त रूप से किए जाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य आत्म-शुद्धि, शक्ति संचय और देवी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करना है।

मातंगी : श्री ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा:।

नौ दिनों तक सात्विक भोजन करें और विचारों को पवित्र रखें।

गुप्त नवरात्रि के अनुष्ठान व्यक्ति के जीवन से संकट, आर्थिक कठिनाइयों और मानसिक तनाव को दूर करने में सहायक read more होते हैं।

कलश स्थापना कब होगी, भगवती की विदाई किस दिन है? जानते हैं एक्सपर्ट से.

* जीवनसाथी या किसी खास मित्र से संबंधों में आ रहे तनाव को दूर करती हैं।

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कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाएं।

यह समय साधक को आत्म-चिंतन और आत्म-साक्षात्कार का अवसर देता है। ध्यान और तपस्या के माध्यम से व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक उन्नति कर सकता है।

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